क्या हमने आजादी की लड़ाई स्वाभाविक रूप से लड़ी है। क्या हम आजादी का मतलब जानतें है। क्या हममें स्वाभिमान है। अगर है तो वो कहाँ गया है - कहाँ खो गया है। आजादी का मतलब
हमारा पूरा भारत भ्रष्टाचार में डूबा है। क्या ये जनता के साथ गद्दारी नहीं है। बिना रिश्वत लिए सरकारी कर्मचारी कोई काम नहीं करते , क्या ये देश की जनता के साथ गद्दारी नहीं है। क्या सरकारी कर्मचारी तनखा नहीं लेते। क्या सरकारी कर्मचारी मुफ्त में काम करतें है।
देश की जनता के साथ गद्दारी , देश के साथ गद्दारी है। देश जनता से बनता है। खाली जमींन देश नहीं बनती।
भ्रष्टाचार आज भारत के रोम रोम में निवास करता है। भ्रष्ट सरकार , भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी -ये सब बिकाऊ होतें है। ये देश के गद्दार होतें है। ये आजादी का मतलब क्या जानें -इनमें स्वाभिमान नहीं होता ,ये बेशरम लोग होतें है। ये लोग लालची होतें है ,पैसे देखकर ये सबकुछ करने को तैयार हो जातें है।
गद्दार बिकाऊ होतें है। हर भ्रष्टाचारी बिकाऊ है। हर भ्रष्टाचारी गद्दार है। सेना कितना भी बलिदान देवे , अगर देश गद्दार होवे तो उनकी कुरबानियों में सेंध लग जाती है। 1962 के जंग में , जनता में एकता और बलिदान की भवना बनाये रखने के लिए , देश के कोने कोने में एकता अभियान चलाये थे।
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